Forgotten role of Od community of UP in Indian freedom struggle

Forgotten role of Od community of UP in Indian freedom struggle

Sun, 22/04/2018 - 11:10
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An incomparable and unforgettable contribution of od in the Indian Independence Struggle of Uttar Pradesh.

India has been an unforgettable history of struggle against the bravery of millions of freedom fighters, sacrifice, sacrifice, and British rule to free from the chains of slavery, and every person of the country salutes them and they always have unwavering respect for them. Is.
It is the matter of those days when the British rule in the country and the people of our country were unhappy with the atrocities of the British, then this sorrow was not seen from four youths of Uttar Pradesh and the country from the slavery of the British. Without caring for his life to liberate his life, he jumped into the independence, and there was only one tarānā on his lips:
" the desire of revolution is now in our heart, we have to see how much of the bāju'ē is in the murderer " and " vande mataram he took part in the ' Satyagraha Movement ' on the occasion of Mahatma Gandhi as a result of which the British government took him in jail. Stopped.
They are the names of the four great, influential freedom fighters of the society:
1. Respected late shri khēmasinha ji the village
Gaundōlī, District Aligarh, Uttar Pradesh
Indigenous people and 'Satyagraha Movement'
Time used to live in moradabad.
2. Respected late shri damodar singh ji district
Aligarh, Uttar Pradesh
3. Respected Late Shri Almond Singh ji district
Aligarh, Uttar Pradesh
4. Respected late master karan singh ji
जिला गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश

Another great vibhūti from Uttar Pradesh, great revolutionary Netaji Subhash Chandra Bose, the brave soldier of the azad hind army of the azad hind army, respected late amar ji, LED to the leadership of netaji subhashchandra Bose in Burma from the British Army in Burma. He fought for two fights from the azad hind fauj.


ये मेरे समाज के लोगों, जरा याद करो कुर्बानी.....
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उत्तर प्रदेश के ओड समाज का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय व अविस्मरणीय योगदान
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भारत देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने में लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता, त्याग बलिदान व ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का अविस्मरणीय इतिहास रहा है और उनको देश का प्रत्येक व्यक्ति नमन करता है तथा उनके प्रति अपने मन में हमेशा अटूट श्रद्धा-भाव रखता है। 
बात उन दिनों की है जब देश में अंग्रेजों का शासन था और हमारे देश के लोग अंग्रेजों के अत्याचारों से बुरी तरह से दुखी थे, तब उत्तर प्रदेश के ओड समाज के चार युवाओं से यह दुख देखा न गया और वे देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए अपनी जान की परवाह किये बगैर स्वतंत्रता महासंग्राम में कूद पड़े, उनके होंठों पर सिर्फ एक ही तराना था:
"सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाजुए कातिल में है " व "वंदे मातरम्" के उद्घोष के साथ उन्होंने महात्मा गांधी जी के आवाह्न पर 'सत्याग्रह आंदोलन' में भाग लिया जिसके फलस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने उनको जेल में बंद कर दिया ।
ओड समाज के उन चार महान, यशस्वी स्वतंत्रता सेनानियों के नाम हैं:
1. आदरणीय स्वर्गीय श्री खेमसिंह जी जो गांव 
गौंदोली, जिला अलीगढ़ , उत्तर प्रदेश के 
मूलनिवासी थे और 'सत्याग्रह आंदोलन' के 
समय मुरादाबाद में रहते थे।
2. आदरणीय स्वर्गीय श्री दामोदर सिंह जी जिला 
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
3. आदरणीय स्वर्गीय श्री बादाम सिंह जी जिला 
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
4. आदरणीय स्वर्गीय मास्टर करण सिंह जी 
जिला गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश
इन चारों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश से ही एक और महान विभूति, महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के जांबाज सिपाही, आदरणीय स्वर्गीय अमरसिंह जी ने भारत देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए ब्रिटिश फौज से बर्मा में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज की तरफ से दो लड़ाईयां लड़ीं। 
आज हम आपको आदरणीय स्वर्गीय श्री खेमसिंह जी की जीवनी को इतिहास में दर्ज लेख व चित्रों के माध्यम से आपसे परिचित करवाएंगे।

 

SOURCE: OCCI

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